निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए: किसी परिमित वर्ग के कल्याण से संबंध रखने वाले धर्म की अपेक्षा विस्तृत जनसमूह के कल्याण से संबंध रखने वाला धर्म उच्च कोटि का है। धर्म की उच्चता उसके लक्ष्य के व्यापकत्व के अनुसार समझी जाती है। गृहधर्म या कुलधर्म से समाजधर्म श्रेष्ठ है, समाजधर्म से लोकधर्म, लोकधर्म से विश्वधर्म, जिसमें धर्म अपने शुद्ध और पूर्ण स्वरूप में दिखाई पड़ता है। यह पूर्ण धर्म अंगी है और शेष धर्म अंग। पूर्ण धर्म, जिसका संबंध अखिल विश्व की स्थिति-रक्षा से है, वस्तुतः पूर्ण पुरुष या पुरुषोत्तम में ही रहता है, जिसकी मार्मिक अनुभूति सच्चे भक्तों को ही हुआ करती है; इसी अनुभूति के अनुरूप उनके आचरण का भी उत्तरोत्तर विकास हो जाता है। गृहधर्म पर दृष्टि रखने वाला किसी परिवार की रक्षा देखकर, वर्गधर्म पर दृष्टि रखने वाला किसी वर्ग या समाज की रक्षा देखकर और लोकधर्म पर दृष्टि रखने वाला लोक या समस्त मनुष्य-जाति की रक्षा देखकर आनंद का अनुभव करता है। पूर्ण या शुद्ध धर्म का स्वरूप सच्चे भक्त ही अपने और दूसरों के सामने लाया करते हैं, जिनके भगवान पूर्ण धर्मस्वरूप हैं। अतः वे कीट-पतंग से लेकर मनुष्य तक सब प्राणियों की रक्षा देखकर आनंद प्राप्त करते हैं। विषय की व्यापकता के अनुसार उनका आनंद भी उच्च कोटि का होता है। उच्च से उच्च भूमि के धर्म का आचरण अत्यंत साधारण कोटि का हो सकता है। इसी प्रकार निम्न भूमि के धर्म का आचरण उच्च से उच्च कोटि का हो सकता है। गरीबों का गला काटने वाले चींटियों के बिलों पर आटा फैलाते देखे जाते हैं; अकाल-पीड़ितों की सहायता में एक पैसा चंदा न देने वाले अपने डूबते मित्र को बचाने के लिए प्राण संकट में डालते देखे जाते हैं। (क) प्रस्तुत गद्यांश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए। (ख) धर्म समाज का कल्याण कैसे करता है? इसे गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (ग) उपर्युक्त गद्यांश की रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए।
Read the following passage on the hierarchy of dharma—from family duty to universal welfare—and answer: (a) write its central idea in your own words; (b) explain, from the passage, how dharma promotes social welfare; (c) explain the underlined sentences.