निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (क) उपर्युक्त गद्यांश का आशय अपने शब्दों में लिखिए। (ख) कर्तव्य-भावना क्यों उपयोगी है? (ग) गद्यांश की रेखांकित पंक्तियों “जहाँ एक व्यक्ति दूसरे की सहायता और सेवा करने की बात सोचता है, वही आदर्श स्थिति स्वर्ग है। इसके विपरीत जब हम प्रत्येक वस्तु को अपने स्वार्थ की दृष्टि से देखते हैं और अधिकार की बात कहकर केवल पाने या लेने की इच्छा रखते हैं, तो हमारे उस आचरण से संघर्ष और विरोध उत्पन्न हो जाता है। उस तनाव की स्थिति में जो न हो जाए, थोड़ा है।” की व्याख्या कीजिए।
Answer the questions based on the following passage.
(क) आशय—भारतीय समाज की स्थिरता का मूल परिवार है। परिवार प्रेम, सेवा, त्याग और पारस्परिक कर्तव्य की शिक्षा देता है। रामायण जैसी आदर्श कृतियाँ बताती हैं कि अधिकार-लिप्सा के स्थान पर कर्तव्य और समर्पण अपनाने से जीवन में सहयोग और शांति आती है। स्वार्थ और केवल पाने की प्रवृत्ति संघर्ष का कारण बनती है।
(ख) कर्तव्य-भावना व्यक्ति को अपने संबंधों और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग बनाती है। इससे सेवा, त्याग, अनुशासन, सहयोग और परस्पर विश्वास बढ़ता है। व्यक्ति केवल अधिकार नहीं माँगता, बल्कि दूसरों के हित के लिए अपना सुख भी त्यागता है। इसी से परिवार और समाज में शांति तथा संगठन बना रहता है।
(ग) रेखांकित अंश में लेखक ने स्वर्ग और संघर्ष की दो विपरीत जीवन-दृष्टियों को स्पष्ट किया है। सहायता, सेवा और स्वार्थ-त्याग की भावना वाला जीवन ही वास्तविक स्वर्ग है, क्योंकि उसमें व्यक्ति दूसरे के सुख को अपना सुख मानता है। इसके विपरीत, जब हर वस्तु को निजी स्वार्थ से देखा जाता है और कर्तव्य की उपेक्षा कर केवल अधिकार एवं प्राप्ति की इच्छा रखी जाती है, तब टकराव, अविश्वास और तनाव जन्म लेते हैं। अतः स्वस्थ पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन के लिए अधिकार और कर्तव्य में संतुलन, परोपकार और सहयोग आवश्यक हैं।
(a) Central idea: Family is the foundation of Indian social strength. It cultivates love, service, sacrifice and mutual duty. Classical ideals such as the Ramayana teach that duty and self-surrender create harmony, whereas selfish insistence on rights alone produces conflict.
(b) A sense of duty makes a person conscious of responsibilities towards family and society. It promotes service, discipline, cooperation and trust, and balances rights with obligations.
(c) The underlined passage contrasts two ways of life. Helping others and sacrificing selfish gain create a heaven-like order. Viewing everything only through self-interest and demanding without serving produces conflict, mistrust and tension. A healthy family and society therefore require duty, cooperation and a balance between rights and responsibilities.