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सामान्य हिंदीGeneral Hindi

प्रश्न 1Question 130 अंक30 marks
भारतीय समाज की शक्ति का स्रोत उसका पारिवारिक जीवन है। अनेक परिवर्तनों के बीच में परिवार की यह दृढ़ शक्ति बारंबार उभरती हुई दिखाई पड़ती है। परिवार की इस शक्ति का विघटन किसी भी प्रकार समाज के लिए हितकारी नहीं हो सकता। भारतीय-परिवार सामाजिक जीवन के क्षेत्र में मूल्यवान प्रयोग है, उसे सब तरह से बढ़ाना, पल्लवित और पुष्पित करना आवश्यक है। आजकल के संक्रांति काल में तो परिवार के संगठन को और भी सुसंस्कृत करना आवश्यक है। कुल-संस्कृति का महत्वपूर्ण ग्रंथ 'रामायण' है। जैसे भारतीय संस्कृति का प्रतीक कुल है, वैसे ही भारतीय साहित्य की विशिष्ट कृति 'रामायण' है। धर्म तत्व परिवार के प्रत्येक सदस्य के समक्ष कर्तव्य का संदेश लाता है। माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन, जाति-बंधु, जिनका परिवार से नाता होता है, वे सब कर्तव्य के ऋण में बँधे होते हैं। कर्तव्य द्वारा व्यक्ति सेवा का मार्ग अपनाता है। कर्तव्य-भावना का ही दूसरा नाम यज्ञीय भावना है। जहाँ व्यक्ति दूसरे के लिए अपने स्वार्थ और सुख का समर्पण करता है, उस जीवन को स्वर्ग कहते हैं। महान ग्रंथ जो आदर्श सिखाते हैं, उनकी भावना यही है। परिवार के प्रेममय वातावरण में सब सदस्य अपने कर्तव्य को पहचानकर उसका पालन करते हैं। दूसरों से छीन-झपटकर अपने लिए कुछ प्राप्त करने की बात वे मन में नहीं लाते। यही पारिवारिक जीवन का रस है। जहाँ एक व्यक्ति दूसरे की सहायता और सेवा करने की बात सोचता है, वही आदर्श स्थिति स्वर्ग है। इसके विपरीत जब हम प्रत्येक वस्तु को अपने स्वार्थ की दृष्टि से देखते हैं और अधिकार की बात कहकर केवल पाने या लेने की इच्छा रखते हैं, तो हमारे उस आचरण से संघर्ष और विरोध उत्पन्न हो जाता है। उस तनाव की स्थिति में जो न हो जाए, थोड़ा है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (क) उपर्युक्त गद्यांश का आशय अपने शब्दों में लिखिए। (ख) कर्तव्य-भावना क्यों उपयोगी है? (ग) गद्यांश की रेखांकित पंक्तियों “जहाँ एक व्यक्ति दूसरे की सहायता और सेवा करने की बात सोचता है, वही आदर्श स्थिति स्वर्ग है। इसके विपरीत जब हम प्रत्येक वस्तु को अपने स्वार्थ की दृष्टि से देखते हैं और अधिकार की बात कहकर केवल पाने या लेने की इच्छा रखते हैं, तो हमारे उस आचरण से संघर्ष और विरोध उत्पन्न हो जाता है। उस तनाव की स्थिति में जो न हो जाए, थोड़ा है।” की व्याख्या कीजिए।

Answer the questions based on the following passage.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(क) आशय—भारतीय समाज की स्थिरता का मूल परिवार है। परिवार प्रेम, सेवा, त्याग और पारस्परिक कर्तव्य की शिक्षा देता है। रामायण जैसी आदर्श कृतियाँ बताती हैं कि अधिकार-लिप्सा के स्थान पर कर्तव्य और समर्पण अपनाने से जीवन में सहयोग और शांति आती है। स्वार्थ और केवल पाने की प्रवृत्ति संघर्ष का कारण बनती है।

(ख) कर्तव्य-भावना व्यक्ति को अपने संबंधों और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग बनाती है। इससे सेवा, त्याग, अनुशासन, सहयोग और परस्पर विश्वास बढ़ता है। व्यक्ति केवल अधिकार नहीं माँगता, बल्कि दूसरों के हित के लिए अपना सुख भी त्यागता है। इसी से परिवार और समाज में शांति तथा संगठन बना रहता है।

(ग) रेखांकित अंश में लेखक ने स्वर्ग और संघर्ष की दो विपरीत जीवन-दृष्टियों को स्पष्ट किया है। सहायता, सेवा और स्वार्थ-त्याग की भावना वाला जीवन ही वास्तविक स्वर्ग है, क्योंकि उसमें व्यक्ति दूसरे के सुख को अपना सुख मानता है। इसके विपरीत, जब हर वस्तु को निजी स्वार्थ से देखा जाता है और कर्तव्य की उपेक्षा कर केवल अधिकार एवं प्राप्ति की इच्छा रखी जाती है, तब टकराव, अविश्वास और तनाव जन्म लेते हैं। अतः स्वस्थ पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन के लिए अधिकार और कर्तव्य में संतुलन, परोपकार और सहयोग आवश्यक हैं।

(a) Central idea: Family is the foundation of Indian social strength. It cultivates love, service, sacrifice and mutual duty. Classical ideals such as the Ramayana teach that duty and self-surrender create harmony, whereas selfish insistence on rights alone produces conflict.

(b) A sense of duty makes a person conscious of responsibilities towards family and society. It promotes service, discipline, cooperation and trust, and balances rights with obligations.

(c) The underlined passage contrasts two ways of life. Helping others and sacrificing selfish gain create a heaven-like order. Viewing everything only through self-interest and demanding without serving produces conflict, mistrust and tension. A healthy family and society therefore require duty, cooperation and a balance between rights and responsibilities.

प्रश्न 2Question 230 अंक30 marks
गरीबी हमारा मानसिक रोग है। यदि आप इस रोग से पीड़ित हैं अथवा इस रोग के शिकार हैं, तो अपने मानसिक भाव को बदल दीजिए। दुःख-दरिद्रता तथा लाचारी के विचार मन में लाने के स्थान पर सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य, स्वाधीनता तथा आनंद के विचारों से अपने मानस-क्षेत्र को प्रकाशित कीजिए। फिर यह देखकर आपके आश्चर्य का पार न रहेगा कि आपकी उन्नति कितने जोरों से हो रही है। हमें विजय और सफलता पूर्णतया मन की वैज्ञानिक प्रक्रिया से प्राप्त होती है। जो मनुष्य समृद्धिशाली और सौभाग्यशाली होता है उसका यह अखण्ड विश्वास होता है कि वह समृद्धिशाली और सौभाग्यशाली हो रहा है। उसे अपनी कमाने की योग्यता पर विश्वास रहता है। वह अपने समय को गरीबी की बातों तथा विचारों में नहीं गंवाता। दरिद्रता से लड़खड़ाता हुआ नहीं चलता। वह अपनी शक्ति को उस वस्तु की ओर मोड़ता है, जिसके लिए कोशिश कर रहा है तथा जिसकी प्राप्ति में उसका पूरा विश्वास एवं दृढ़ निश्चय है। देश में ऐसे गरीब लोग हैं, जो अपनी गरीबी से अर्ध-संतुष्ट हो गए हैं और जिन्होंने उसके विकराल पंजों से निकलने का प्रयत्न ही छोड़ दिया है। अब वे चाहे कितना ही कठिन परिश्रम करें, उन्होंने तो अपनी आशा खो दी है — स्वाधीनता प्राप्त करने की उमंग नष्ट कर दी है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (क) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (ख) गरीबी से अर्ध-संतुष्ट होने का क्या आशय है? (ग) गद्यांश का संक्षेपण (एक-तिहाई शब्दों में) कीजिए।

Answer the questions based on the following passage.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(क) उचित शीर्षक—“समृद्धि का मानसिक संकल्प”।

(ख) गरीबी से अर्ध-संतुष्ट होने का अर्थ है—दरिद्रता को नियति मान लेना, उससे निकलने की आशा और प्रयत्न छोड़ देना तथा अपनी क्षमता पर विश्वास खो देना। ऐसा व्यक्ति कठिन परिश्रम करते हुए भी लक्ष्यहीन रहता है क्योंकि उसके मन में उन्नति की उमंग नहीं बचती।

(ग) संक्षेपण—गरीबी को केवल बाहरी अभाव नहीं, बल्कि पराजित मानसिकता के रूप में भी समझना आवश्यक है। मनुष्य यदि दुःख और लाचारी के विचारों के स्थान पर समृद्धि, स्वाधीनता और सफलता का विश्वास जगाए, तो उसकी शक्तियाँ लक्ष्य की ओर संगठित होती हैं। सफलता के लिए कमाने की योग्यता, समय और प्रयत्न पर भरोसा आवश्यक है। जो लोग गरीबी को नियति मानकर उससे निकलने का प्रयास छोड़ देते हैं, वे आशा और स्वाधीनता की आकांक्षा खो बैठते हैं। अतः उन्नति का प्रथम साधन सकारात्मक, कर्मशील और दृढ़ मन है।

(a) Suitable title: “Mental Resolve for Prosperity.”

(b) Being half-content with poverty means accepting deprivation as fate, abandoning hope and effort, and losing faith in one’s capacity to improve.

(c) Precis: Poverty is also a defeated state of mind. Replacing thoughts of helplessness with confidence, freedom and purposeful effort organises human energy towards success. Faith in one’s ability, disciplined use of time and persistent action are essential. Those who accept poverty as destiny lose hope and the urge for independence. A positive, active and resolute mind is therefore the first instrument of progress.

प्रश्न 3Question 320 अंक20 marks

(क) सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव (नीति), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित किए जाने वाले एक अर्द्ध-सरकारी पत्र का प्रारूप प्रस्तुत कीजिए, जिसमें आयात नीति निर्धारण विषयक सूचनाएँ शीघ्र भेजने का संदर्भ हो। (ख) सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी की जाने वाली अधिसूचना का प्रारूप प्रस्तुत कीजिए, जिसमें गोवर्धन पर्वत के परिक्रमा-पथ में एक अस्थायी थाना सृजित करने की सूचना हो।

Draft the prescribed demi-official letter and government notification.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(क) अर्ध-सरकारी पत्र

अर्ध-सरकारी पत्र संख्या: ………… भारत सरकार वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय वाणिज्य विभाग नई दिल्ली, दिनांक ……

प्रिय श्री/सुश्री …….,

विषय: आयात नीति निर्धारण हेतु अपेक्षित सूचनाएँ शीघ्र उपलब्ध कराने के संबंध में।

आगामी आयात नीति की समीक्षा मंत्रालय में अंतिम चरण में है। इस संबंध में आपके प्रभाग से वस्तुवार आयात प्रवृत्ति, घरेलू उत्पादन-क्षमता, आवश्यक कच्चे माल, शुल्क प्रभाव तथा संबंधित हितधारकों की टिप्पणियाँ अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। इन सूचनाओं के अभाव में नीति-निर्धारण और अंतर-मंत्रालयी परामर्श प्रभावित हो रहा है।

आपसे व्यक्तिगत रूप से अनुरोध है कि संलग्न प्रारूप में अद्यतन सूचना दिनांक …… तक ई-मेल तथा हस्ताक्षरित प्रति के रूप में भिजवाने की व्यवस्था करें। किसी कठिनाई की स्थिति में संयुक्त सचिव (व्यापार नीति) से तत्काल संपर्क किया जा सकता है।

सादर, (क) सचिव

श्री/सुश्री …… संयुक्त सचिव (नीति) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, नई दिल्ली।

(ख) अधिसूचना

उत्तर प्रदेश शासन गृह (पुलिस) अनुभाग अधिसूचना लखनऊ, दिनांक …… संख्या: …………

जनहित तथा गोवर्धन पर्वत परिक्रमा-पथ पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात-नियमन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से राज्यपाल, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से, जनपद मथुरा में परिक्रमा अवधि दिनांक …… से …… तक “अस्थायी थाना—गोवर्धन परिक्रमा-पथ” सृजित करते हैं। इसका मुख्यालय …… पर होगा और इसकी क्षेत्राधिकार-सीमा संलग्न अनुसूची के अनुसार होगी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा आवश्यक बल, संचार, यातायात, महिला सहायता, अग्नि एवं आपदा समन्वय की व्यवस्था करेंगे। अवधि समाप्त होने पर थाना स्वतः समाप्त माना जाएगा, जब तक पृथक आदेश न हो।

आज्ञा से, (ख) सचिव, गृह विभाग उत्तर प्रदेश शासन

Worked answer: The Hindi answer supplies a properly structured demi-official letter from the Secretary, Ministry of Commerce and Industry, seeking urgent import-policy data from the Joint Secretary (Policy), and a formal Uttar Pradesh Government notification creating a temporary police station on the Govardhan Parikrama route. It includes file number, date, subject, concise factual body, authority, jurisdiction, duration and signature blocks.

प्रश्न 4Question 410 अंक10 marks

निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए। अभिमुख, अभ्यंतर, नागर, प्रकट, लघिमा, उद्यत, पैना, अनुग्रह, घात, स्थावर

Write the antonyms of the following Hindi words: अभिमुख, अभ्यंतर, नागर, प्रकट, लघिमा, उद्यत, पैना, अनुग्रह, घात, स्थावर.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

अभिमुख—विमुख; अभ्यंतर—बाह्य; नागर—ग्रामीण; प्रकट—अप्रकट/गुप्त; लघिमा—गरिमा; उद्यत—विरत/अनुद्यत; पैना—कुंद; अनुग्रह—निग्रह; घात—प्रतिघात/रक्षा; स्थावर—जंगम।

Antonyms: facing—turned away; interior—exterior; urban/civilised—rural; manifest—hidden; lightness—heaviness/dignity; ready/raised—withdrawn; sharp—blunt; favour—restraint/disfavour; attack—counter-attack/defence; immovable—movable.

प्रश्न 5Question 510 अंक10 marks

(क) निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग पृथक कीजिए। संकेत, अन्वय, अतीत, स्वयं, आबालवृद्ध (ख) निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय पृथक कीजिए। आदरणीय, दृष्ट, उठान, पुजारी, श्रद्धालु

Separate the prefixes and suffixes used in the given words.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(क) उपसर्ग—संकेत: सम् + केत; अन्वय: अनु + अय (सन्धि से अन्वय); अतीत: अति + इत; स्वयं: स्व + यम् (यह सामान्य उपसर्ग-युक्त व्युत्पत्ति नहीं, मूल रूप है); आबालवृद्ध: आ + बालवृद्ध।

(ख) प्रत्यय—आदरणीय: आदर + अनीय; दृष्ट: दृश् + क्त; उठान: उठ + आन; पुजारी: पूजा + आरी; श्रद्धालु: श्रद्धा + आलु।

टिप्पणी: व्युत्पत्ति-विश्लेषण में पाठ्यपुस्तक/व्याकरण परंपरा के अनुसार रूपांतर और सन्धि को ध्यान में रखा गया है।

Prefix and suffix separation is provided in the Hindi answer. A caution is retained for स्वयं because it is ordinarily treated as an independent lexical form rather than a regular productive prefix construction.

प्रश्न 6Question 610 अंक10 marks

निम्नलिखित वाक्यांश या पदबंध के लिए एक-एक शब्द लिखिए। (i) जिसका कोई शत्रु उत्पन्न न हुआ हो (ii) पहाड़ के ऊपर की समभूमि (iii) पैर से लेकर सिर तक (iv) रात को दिखाई न देने का रोग (v) दूसरे के स्थान पर काम करने वाला

Give one word for each phrase: one whose enemy has not been born; a level tract on a mountain; from foot to head; a disease causing inability to see at night; one who works in another's place.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(1) अजातशत्रु, (2) पठार, (3) आपादमस्तक, (4) रतौंधी, (5) स्थानापन्न/प्रतिनिधि।

One-word substitutions: one without an enemy—Ajatashatru; level land on a mountain—plateau; from feet to head—head-to-foot; night blindness; substitute/representative.

प्रश्न 7Question 710 अंक10 marks

(क) निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए। सृष्टा, महातम्य, विश्राम, अंतर्धान, वांड्गमय (ख) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए। (i) मैं उसे सब कुछ समझा लूँगा। (ii) सदा सच बोलना उसकी आदत था। (iii) भोजन को स्वादिष्ट होना चाहिए। (iv) तुम्हारा हृदय वज्र है, पत्थर है। (v) वह विलाप करके रोने लगा।

Correct the spelling and the sentences.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(क) शुद्ध वर्तनी—स्रष्टा, माहात्म्य, विश्राम, अंतर्धान, वाङ्मय।

(ख) शुद्ध वाक्य— (1) मैं उसे सब कुछ समझा दूँगा। (2) सदा सच बोलना उसकी आदत थी। (3) भोजन स्वादिष्ट होना आवश्यक है। (4) तुम्हारा हृदय वज्र के समान कठोर है। (5) वह विलाप करने लगा।

The Hindi answer corrects five spellings and removes grammatical, gender, case, comparison and redundancy errors from the five sentences.

प्रश्न 8Question 830 अंक30 marks

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए। (i) पगड़ी बदलना (ii) बुलबुल पालना (iii) काले तिल चबाना (iv) जुए को कंधे से उतारना (v) कंबल ओढ़कर लूटना (vi) अशर्फियाँ लुटें और कोयलों पर मोहर (vii) उतर गई लोई क्या करेगा कोई (viii) खूँटे के बल बछड़ा कूदे (ix) दाल-भात में मूसल चंद (x) नौ की लकड़ी नब्बे खर्च

State the meaning of each of the ten idioms/proverbs and use each in a sentence so that its meaning becomes clear: पगड़ी बदलना; बुलबुल पालना; काले तिल चबाना; जुए को कंधे से उतारना; कंबल ओढ़कर लूटना; अशर्फियाँ लुटें और कोयलों पर मोहर; उतर गई लोई क्या करेगा कोई; खूँटे के बल बछड़ा कूदे; दाल-भात में मूसल चंद; नौ की लकड़ी नब्बे खर्च.

मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तरMains Examination Abhyas Answer

(1) पगड़ी बदलना—घनिष्ठ मित्रता/भाईचारा स्थापित करना। वाक्य: दोनों परिवारों ने पगड़ी बदलकर पीढ़ियों की मित्रता दृढ़ कर ली। (2) बुलबुल पालना—मन में व्यर्थ आशा या कल्पना पालना। वाक्य: बिना तैयारी सफलता की बुलबुल पालना उचित नहीं। (3) काले तिल चबाना—कठिन संकट या कड़ा दंड सहना। वाक्य: नियम तोड़ने वालों को अब काले तिल चबाने पड़ेंगे। (4) जुए को कंधे से उतारना—भार/उत्तरदायित्व से मुक्त होना। वाक्य: ऋण चुकाकर उसने वर्षों पुराना जुआ कंधे से उतार दिया। (5) कंबल ओढ़कर लूटना—भलमनसाहत का ढोंग कर छल करना। वाक्य: वह सेवा का मुखौटा पहनकर कंबल ओढ़कर लूटने वालों में था। (6) अशर्फियाँ लुटें और कोयलों पर मोहर—बड़े अपव्यय की उपेक्षा, छोटे खर्च पर अत्यधिक रोक। वाक्य: परियोजना में करोड़ों व्यर्थ गए, पर कागज बचाने का आदेश—अशर्फियाँ लुटें और कोयलों पर मोहर। (7) उतर गई लोई क्या करेगा कोई—मान-मर्यादा चली जाए तो भय नहीं रहता। वाक्य: बार-बार पकड़े जाने के बाद उसकी हालत ‘उतर गई लोई क्या करेगा कोई’ जैसी हो गई। (8) खूँटे के बल बछड़ा कूदे—शक्तिशाली संरक्षक के भरोसे अकड़ना। वाक्य: अधिकारी रिश्तेदार के कारण वह खूँटे के बल बछड़ा कूदे की तरह व्यवहार करता है। (9) दाल-भात में मूसलचंद—अनावश्यक हस्तक्षेप करने वाला। वाक्य: दो पक्ष सहमत थे, पर वह दाल-भात में मूसलचंद बनकर विवाद बढ़ा गया। (10) नौ की लकड़ी नब्बे खर्च—वस्तु से कई गुना अधिक सहायक खर्च। वाक्य: सस्ती मशीन के रखरखाव पर भारी खर्च हुआ—नौ की लकड़ी नब्बे खर्च।

The Hindi answer gives the accepted functional meaning and an original sentence for each of the ten idioms/proverbs: ritual friendship; vain hope; severe hardship; release from burden; deceit under a respectable cover; extravagance in large matters but penny-pinching in small ones; shamelessness after loss of reputation; arrogance based on a patron; needless interference; and disproportionate incidental expenditure.

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