भारतीय समाज की शक्ति का स्रोत उसका पारिवारिक जीवन है। अनेक परिवर्तनों के बीच में परिवार की यह दृढ़ शक्ति बारंबार उभरती हुई दिखाई पड़ती है। परिवार की इस शक्ति का विघटन किसी भी प्रकार समाज के लिए हितकारी नहीं हो सकता। भारतीय-परिवार सामाजिक जीवन के क्षेत्र में मूल्यवान प्रयोग है, उसे सब तरह से बढ़ाना, पल्लवित और पुष्पित करना आवश्यक है। आजकल के संक्रांति काल में तो परिवार के संगठन को और भी सुसंस्कृत करना आवश्यक है। कुल-संस्कृति का महत्वपूर्ण ग्रंथ 'रामायण' है। जैसे भारतीय संस्कृति का प्रतीक कुल है, वैसे ही भारतीय साहित्य की विशिष्ट कृति 'रामायण' है। धर्म तत्व परिवार के प्रत्येक सदस्य के समक्ष कर्तव्य का संदेश लाता है। माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन, जाति-बंधु, जिनका परिवार से नाता होता है, वे सब कर्तव्य के ऋण में बँधे होते हैं। कर्तव्य द्वारा व्यक्ति सेवा का मार्ग अपनाता है। कर्तव्य-भावना का ही दूसरा नाम यज्ञीय भावना है। जहाँ व्यक्ति दूसरे के लिए अपने स्वार्थ और सुख का समर्पण करता है, उस जीवन को स्वर्ग कहते हैं। महान ग्रंथ जो आदर्श सिखाते हैं, उनकी भावना यही है। परिवार के प्रेममय वातावरण में सब सदस्य अपने कर्तव्य को पहचानकर उसका पालन करते हैं। दूसरों से छीन-झपटकर अपने लिए कुछ प्राप्त करने की बात वे मन में नहीं लाते। यही पारिवारिक जीवन का रस है। जहाँ एक व्यक्ति दूसरे की सहायता और सेवा करने की बात सोचता है, वही आदर्श स्थिति स्वर्ग है। इसके विपरीत जब हम प्रत्येक वस्तु को अपने स्वार्थ की दृष्टि से देखते हैं और अधिकार की बात कहकर केवल पाने या लेने की इच्छा रखते हैं, तो हमारे उस आचरण से संघर्ष और विरोध उत्पन्न हो जाता है। उस तनाव की स्थिति में जो न हो जाए, थोड़ा है।
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Answer the questions based on the following passage.
प्रश्न 2 — Question 230 अंक — 30 marks
गरीबी हमारा मानसिक रोग है। यदि आप इस रोग से पीड़ित हैं अथवा इस रोग के शिकार हैं, तो अपने मानसिक भाव को बदल दीजिए। दुःख-दरिद्रता तथा लाचारी के विचार मन में लाने के स्थान पर सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य, स्वाधीनता तथा आनंद के विचारों से अपने मानस-क्षेत्र को प्रकाशित कीजिए। फिर यह देखकर आपके आश्चर्य का पार न रहेगा कि आपकी उन्नति कितने जोरों से हो रही है। हमें विजय और सफलता पूर्णतया मन की वैज्ञानिक प्रक्रिया से प्राप्त होती है। जो मनुष्य समृद्धिशाली और सौभाग्यशाली होता है उसका यह अखण्ड विश्वास होता है कि वह समृद्धिशाली और सौभाग्यशाली हो रहा है। उसे अपनी कमाने की योग्यता पर विश्वास रहता है। वह अपने समय को गरीबी की बातों तथा विचारों में नहीं गंवाता। दरिद्रता से लड़खड़ाता हुआ नहीं चलता। वह अपनी शक्ति को उस वस्तु की ओर मोड़ता है, जिसके लिए कोशिश कर रहा है तथा जिसकी प्राप्ति में उसका पूरा विश्वास एवं दृढ़ निश्चय है। देश में ऐसे गरीब लोग हैं, जो अपनी गरीबी से अर्ध-संतुष्ट हो गए हैं और जिन्होंने उसके विकराल पंजों से निकलने का प्रयत्न ही छोड़ दिया है। अब वे चाहे कितना ही कठिन परिश्रम करें, उन्होंने तो अपनी आशा खो दी है — स्वाधीनता प्राप्त करने की उमंग नष्ट कर दी है।
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Answer the questions based on the following passage.
प्रश्न 3 — Question 320 अंक — 20 marks
पत्र और अधिसूचना के प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।
Draft the prescribed demi-official letter and government notification.
Write the antonyms of the following Hindi words: अभिमुख, अभ्यंतर, नागर, प्रकट, लघिमा, उद्यत, पैना, अनुग्रह, घात, स्थावर.
प्रश्न 5 — Question 510 अंक — 10 marks
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग और प्रत्यय पृथक कीजिए।
Separate the prefixes and suffixes used in the given words.
प्रश्न 6 — Question 610 अंक — 10 marks
निम्नलिखित वाक्यांश या पदबंध के लिए एक-एक शब्द लिखिए। (i) जिसका कोई शत्रु उत्पन्न न हुआ हो (ii) पहाड़ के ऊपर की समभूमि (iii) पैर से लेकर सिर तक (iv) रात को दिखाई न देने का रोग (v) दूसरे के स्थान पर काम करने वाला
Give one word for each phrase: one whose enemy has not been born; a level tract on a mountain; from foot to head; a disease causing inability to see at night; one who works in another's place.
प्रश्न 7 — Question 710 अंक — 10 marks
वर्तनी और वाक्य शुद्ध कीजिए।
Correct the spelling and the sentences.
प्रश्न 8 — Question 830 अंक — 30 marks
निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए। (i) पगड़ी बदलना (ii) बुलबुल पालना (iii) काले तिल चबाना (iv) जुए को कंधे से उतारना (v) कंबल ओढ़कर लूटना (vi) अशर्फियाँ लुटें और कोयलों पर मोहर (vii) उतर गई लोई क्या करेगा कोई (viii) खूँटे के बल बछड़ा कूदे (ix) दाल-भात में मूसल चंद (x) नौ की लकड़ी नब्बे खर्च
State the meaning of each of the ten idioms/proverbs and use each in a sentence so that its meaning becomes clear: पगड़ी बदलना; बुलबुल पालना; काले तिल चबाना; जुए को कंधे से उतारना; कंबल ओढ़कर लूटना; अशर्फियाँ लुटें और कोयलों पर मोहर; उतर गई लोई क्या करेगा कोई; खूँटे के बल बछड़ा कूदे; दाल-भात में मूसल चंद; नौ की लकड़ी नब्बे खर्च.
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