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सामान्य हिंदीGeneral Hindi

72PYQ 64Abhyas 8
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2024Year 2024
प्रश्न 2Question 2
सहयोग से ही जीवन है, स्पर्धा तो अन्ततः विनाश और मृत्यु की ओर ले जाती है। हम अपने साथ अन्य को भी लें, यदि वह पिछड़ जाता है तो उसकी मदद करें। यदि हम सभी परस्पर यह भाव अपनाते हैं तो हम एक-दूसरे के संकट में साथी बनकर एक-दूसरे को बचाएँगे और विकास के मार्ग पर एक-दूसरे को प्रोत्साहित करेंगे। सहयोग की इस प्रक्रिया में ही जीवन सुरक्षित है। यदि हम अपना ही स्वार्थ सामने रखकर अन्य की टाँग खींचते हुए स्वयं को ही आगे बढ़ाएँगे तो यह स्पर्धा होगी और यह स्पर्धा एक-दूसरे को खिलाफ करते हुए आपस में लड़ने-भिड़ने और अन्ततः एक-दूसरे का विनाश करने का कारण बनेगी। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध अपने-अपने साम्राज्य, उपनिवेश तथा व्यापार को बढ़ाने के संघर्ष का परिणाम थे जिसमें व्यापक नरसंहार हुआ। वस्तुतः स्पर्धा मानव संस्कृति के लिए विनाश का मार्ग है। व्यक्तियों एवं राष्ट्रों के बीच आपसी सहयोग से ही मानव संस्कृति सुरक्षित है। वर्तमान में यह जो भूमण्डलीकरण और आर्थिक उदारीकरण का नारा है, वह विकसित देशों के आर्थिक साम्राज्य को बढ़ाने का नवीनतम अभियान है जिसमें विकसित देशों के आपसी हित भी टकरा रहे हैं तथा जिसमें नए विश्व संकट की आशंकाएँ उभर रही हैं। उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (क) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (5) (ख) स्पर्धा और सहयोग में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (5) (ग) गद्यांश का संक्षेपण (लगभग एक-तिहाई शब्दों में) कीजिए। (20)Precis/summary passage and three questions.मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2023Year 2023
प्रश्न 2Question 2
नैतिकता-विषयक गद्यांश के आधार पर—(क) उचित शीर्षक दीजिए। (ख) धर्म और नैतिकता का संबंध स्पष्ट कीजिए। (ग) गद्यांश का लगभग एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए।Based on the passage concerning morality, give an appropriate title, explain the relationship between religion and morality, and précis the passage in about one-third of its length.मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2022Year 2022
प्रश्न 2Question 2
दिये गये गद्यांश के आधार पर (क) उचित शीर्षक, (ख) नये भारतीय समाजशास्त्र की आवश्यकता, और (ग) संक्षेपण लिखिए। गद्यांश मानव-केन्द्रित समाजशास्त्र, समता, एकत्व और सर्वभूतहित की भारतीय दृष्टि पर केन्द्रित है।On the basis of the passage, provide (a) a suitable title, (b) reasons for a new Indian sociology, and (c) a précis. The passage advocates a human-centred Indian sociology rooted in equality, unity and welfare of all beings.मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2021Year 2021
प्रश्न 2Question 2
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर निर्देशानुसार उत्तर लिखिए: लोभियों का दमन योगियों के दमन से किसी प्रकार कम नहीं होता। लोभ के बल से वे काम और क्रोध को जीतते हैं, सुख की वासना का त्याग करते हैं, मान-अपमान में समान भाव रखते हैं। अब और चाहिए क्या? जिससे वे कुछ पाने की आशा रखते हैं, वह यदि उन्हें दस गालियाँ भी देता है तो उनकी आकृति पर न रोष का कोई चिह्न प्रकट होता है और न मन में ग्लानि होती है। न उन्हें मक्खी चूसने में घृणा होती है और न रक्त चूसने में दया। सुंदर से सुंदर रूप देखकर वे अपनी एक कौड़ी भी नहीं भूलते। करुण से करुण स्वर सुनकर वे अपना एक पैसा भी किसी के यहाँ नहीं छोड़ते। तुच्छ से तुच्छ व्यक्ति के सामने हाथ फैलाने में वे लज्जित नहीं होते। क्रोध, दया, घृणा, लज्जा आदि करने से क्या मिलता है कि वे करने जाएँ? जिस बात से उन्हें कुछ मिलता नहीं, जबकि उसके लिए उनके मन के किसी कोने में जगह नहीं होती, तब जिस बात से पास का कुछ जाता है, वह बात उन्हें कैसी लगती होगी—यह यों ही समझा जा सकता है। जिस बात में कुछ लगे, वह उनके किसी काम की नहीं—चाहे वह कष्ट-निवारण हो या सुख-प्राप्ति, धर्म हो या न्याय। वे शरीर सुखाते हैं, अच्छे भोजन, अच्छे वस्त्र आदि की आकांक्षा नहीं करते; लोभ के अंकुश से अपनी संपूर्ण इंद्रियों को वश में रखते हैं। लोभियों! तुम्हारा अक्रोध, तुम्हारा इंद्रिय-निग्रह, तुम्हारी मानापमान-समता, तुम्हारा तप अनुकरणीय है; तुम्हारी निष्ठुरता, तुम्हारी निर्लज्जता, तुम्हारा अविवेक, तुम्हारा अन्याय विगर्हणीय है। तुम धन्य हो! तुम्हें धिक्कार है!! (क) प्रस्तुत गद्यांश के लिए उचित शीर्षक दीजिए। (ख) उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर लोभियों के लक्षण बताइए। (ग) उपर्युक्त गद्यांश का संक्षेपण कीजिए।Read the satirical passage describing the austerity, self-restraint and moral defects of greedy persons and answer: (a) give a suitable title; (b) state the characteristics of greedy persons; (c) précis the passage.मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2020Year 2020
प्रश्न 2Question 2
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर निर्देशानुसार उत्तर लिखिये। विद्वानों का मानना है कि राजनीति ने भाषा को भ्रष्ट कर दिया है; शब्दों से उनके सही अर्थ छीनकर उन्हें छद्म अर्थ पहना दिये हैं। संसद, संविधान, कानून, जनहित, न्याय, अधिकार, साक्ष्य, जाँच जैसे ढेरों शब्द अपना असली अर्थ खोकर बदशक्ल हो चुके हैं। शब्द भले ही अच्छा या बुरा कोई भी अर्थ प्रकट करता हो, जब अपना असली अर्थ खो देता है, तो वह बदशक्ल हो जाता है। भाषा का भ्रंश, अन्ततः सामाजिक मानवीय मूल्यों का भ्रंश है। कल्पना कीजिये कि एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से जो कहे उसका वही अर्थ न हो, जो भाषा प्रकट करती है, या ऐसे अनुभवों की पुनरावृत्ति के कारण दूसरा व्यक्ति उसे सही अर्थ में न लेकर उसमें अनर्थ या अन्य अर्थ खोजने लगे तो क्या होगा? यह मनुष्य का मनुष्य पर से विश्वास उठने का मामला है, जो सामाजिक विघटन की शृंखला का पहला और अंतिम चरण है। पहला इसलिए कि भाषा को मनुष्य ने परस्पर संवाद और सही संप्रेषण के लिए गढ़ा है और अंतिम इसलिए कि आगे चलकर मनुष्य का कर्म भी भाषा के मूल अर्थ का नहीं, उसके भ्रंश का रूप ले लेता है। क्या हम भाषा को भ्रष्ट करने की परिणति राजनीतिक और सामाजिक जीवन के चरम पतन में नहीं देख रहे? (क) प्रस्तुत गद्यांश के लिए उचित शीर्षक दीजिये। (ख) उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर भाषा की भूमिका पर प्रकाश डालिये। (ग) उपर्युक्त गद्यांश का संक्षेपण कीजिये।मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2019Year 2019
प्रश्न 2Question 2
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर (क) उपयुक्त शीर्षक दीजिए, (ख) साहित्य और राजनीति की भाषा में प्रमुख अंतर स्पष्ट कीजिए तथा (ग) गद्यांश का संक्षेपण कीजिए।मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
PYQमुख्य परीक्षाMainsवर्ष 2018Year 2018
प्रश्न 2Question 2
दिए गए गद्यांश को पढ़कर उत्तर दीजिए: (क) उचित शीर्षक दीजिए। (ख) प्राचीन और नवीन में संतुलन क्यों आवश्यक है? (ग) गद्यांश का संक्षेपण कीजिए।Read the passage and answer: (a) give a suitable title; (b) explain why balance between the old and the new is necessary; and (c) write a précis.मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer
अभ्यासAbhyasमुख्य परीक्षाMains
प्रश्न 2Question 2
अपठित गद्यांश-II एवं संक्षेपण गद्यांश: जल-संकट केवल वर्षा की कमी का परिणाम नहीं है; वह हमारे उपयोग, नियोजन और सामाजिक व्यवहार से भी उत्पन्न होता है। अनेक क्षेत्रों में वर्षा का अधिकांश जल शीघ्र बहकर निकल जाता है, क्योंकि तालाब, आहर, कुएँ और छोटी जलधाराएँ उपेक्षित हैं। दूसरी ओर, भूजल को निजी संपत्ति समझकर अनियंत्रित रूप से निकाला जाता है, जबकि जलभृत की सीमा खेत या मकान की सीमा से कहीं बड़ी होती है। अतः एक व्यक्ति का अधिक दोहन पूरे गाँव के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। जल-संरक्षण का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएँ नहीं, बल्कि छत का पानी रोकना, मिट्टी में नमी बढ़ाना, फसलों का विवेकपूर्ण चयन करना, रिसाव रोकना और उपयोग किए गए जल को पुनः काम में लाना भी है। ग्रामसभा, नगर निकाय, विद्यालय, उद्योग और परिवार—सभी की भूमिका है। स्थानीय जल-बजट तैयार कर यह जानना चाहिए कि कितना जल उपलब्ध है और उसका कितना उपयोग सुरक्षित है। जल का न्यायपूर्ण वितरण भी आवश्यक है, क्योंकि संकट का भार प्रायः महिलाओं, गरीबों और दूरस्थ बस्तियों पर अधिक पड़ता है। भविष्य की जल-सुरक्षा तभी सम्भव है, जब संरक्षण को अभियान नहीं, दैनिक अनुशासन बनाया जाए। (क) उपर्युक्त गद्यांश का लगभग एक-तिहाई शब्दों में संक्षेप लिखिए तथा उपयुक्त शीर्षक दीजिए। [20] (ख) गद्यांश के अनुसार जल-संकट के दो मानवीय कारण लिखिए। [5] (ग) ‘स्थानीय जल-बजट’ से क्या आशय है? [5]मुख्य परीक्षा अभ्यास उत्तर हेतु प्रवेश करेंSign in for answer

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